सोनपुर मेला में बायस्कोप से सरकारी योजनाओं की जानकारी का नया तरीका | Sonpur Fair

सोनपुर मेला में पुराने जमाने के बायस्कोप को एक नई भूमिका में देखा जा रहा है। जहां पहले यह केवल मनोरंजन का जरिया था, आज इसे सरकारी योजनाओं के संदेशवाहक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के युग में भी यह पारंपरिक माध्यम ग्रामीण इलाकों में लोगों को कुपोषण, बाल संरक्षण, गर्भवती महिलाओं की योजनाओं और दिव्यांगजन कल्याण जैसी जानकारियां सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचा रहा है।
समाज कल्याण विभाग की पहल से ईसीडीएस आंगनवाड़ी केंद्र के स्टॉल पर स्थापित बायस्कोप पर चित्रों और ध्वनि के माध्यम से बच्चों के पोषण, टीकाकरण, और पोषण ट्रैकर ऐप के उपयोग जैसे विषयों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना, आयरन फोलिक एसिड का महत्व, संस्थागत प्रसव आदि को भी दर्शाया गया है।
बाल विवाह, बाल श्रम और तस्करी जैसे सामाजिक कुप्रथाओं से बचाव के संदेश और जिला बाल संरक्षण इकाई की हेल्पलाइन तथा त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की जानकारी भी बायस्कोप द्वारा दी जा रही है। दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं में पेंशन, सहायक उपकरण और पुनर्वास सेवाओं को कहानी के रूप में समझाया गया है।
डीपीओ (आईसीडीएस) किरण शर्मा के अनुसार, यह प्रयास बायस्कोप को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए इसे एक प्रभावी सूचना माध्यम बनाने का है, खासकर उन लोगों के लिए जो सीधे डिजिटल साधनों से जुड़ नहीं पाते।
सोनपुर मेला, जो सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जाना जाता है, अब सामाजिक जागरूकता का भी मंच बन चुका है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुँच बढ़ेगी और सकारात्मक बदलाव की उम्मीदें जगेंगी।
“जब परंपराएं आधुनिक मकसद से जुड़ती हैं, तभी समाज में सच्चा परिवर्तन संभव होता है।”