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Upasana Kamineni IVF बयान पर बवाल, सोशल Media पर भारी बहस

JantaTimes Staff19 November 2025 at 4:04 pm
राम चरण की पत्नी उपासना कामिनेनी के IVF और एग-फ्रीजिंग वाले बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जहां यूजर्स ने उन्हें 'IVF प्रमोशन' का आरोप लगाकर घेरा है।
Upasana Kamineni IVF बयान पर बवाल, सोशल Media पर भारी बहस

Upasana Kamineni IVF Controversy से जुड़ी ये पूरी कहानी आज सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है। राम चरण की पत्नी और अपोलो ग्रुप से जुड़ी बिजनेसवुमन उपासना कामिनेनी ने हाल ही में एक बयान दिया, जिसने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना था कि युवा लड़कियों के लिए एग-फ्रीजिंग सबसे बड़ा 'इंश्योरेंस' है, जिससे वे अपनी शर्तों पर शादी और बच्चे प्लान कर सकती हैं।

यह बयान IIT हैदराबाद में दिए गए उनके सेशन से सामने आया, जिसे उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया था। उसी वीडियो में उपासना साफ कहती नजर आती हैं कि महिलाओं को जिंदगी के फैसले लेने के लिए फाइनेंशियल और पर्सनल इंडिपेंडेंस सबसे पहले चाहिए, और एग-फ्रीजिंग उन्हें वह स्पेस देता है। लेकिन उनकी यह राय कई लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आई और देखते ही देखते यह पूरा मामला एक डिजिटल विवाद में बदल गया।

बहुत से यूजर्स ने उनकी इस बात को 'IVF को प्रमोट करने' जैसा बताया। कुछ ने कहा कि वह अपने अपोलो ग्रुप के फर्टिलिटी बिजनेस को बढ़ावा दे रही हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनकी बातों को 'मिसलीडिंग', 'अनरियलिस्टिक' और 'कमर्शियल माइंडसेट' जैसा बताया। यही नहीं, कई कमेंट्स में यह भी कहा गया कि एग-फ्रीजिंग एक बेहद कठिन और दर्दनाक प्रक्रिया है, जिसे इतना आसान और आम सलाह की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए।

IIT सेशन में उपासना ने कहा था—महिलाओं का सबसे बड़ा इंश्योरेंस है अपने एग्स सेव करना। इससे वे खुद तय कर सकती हैं कि कब शादी करनी है, कब बच्चे प्लान करने हैं और कब वे आर्थिक रूप से खुद को तैयार समझती हैं। उन्होंने बताया कि आज की लड़कियां ज्यादा करियर फोकस्ड हैं, जबकि लड़के ज्यादा शादी के लिए तैयार दिखते हैं। यही बात उन्होंने 'प्रोग्रेसिव इंडिया' का एक उदाहरण बताते हुए कही थी।

लेकिन उनकी यह बात कई महिलाओं और पुरुषों दोनों को रास नहीं आई। एक यूजर ने पोस्ट पर लिखा कि उपासना सिर्फ अपने अपोलो IVF और एग-फ्रीजिंग बिजनेस को प्रमोट कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजनेस इंटरेस्ट के कारण उपासना इस तरह की सलाह को एक सामान्य समाधान की तरह पेश कर रही हैं। कई कमेंट्स में यह भी कहा गया कि रिश्तों, शादी और बच्चों के फैसले को सिर्फ 'इंश्योरेंस' की तरह बताना गलत है और इससे समाज के प्राकृतिक मूल्यों में गड़बड़ी आती है।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि एग-फ्रीजिंग की प्रक्रिया को इतना आसान बताना भ्रामक है क्योंकि यह मेडिकल रूप से मुश्किल, खर्चीली और भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होती है। कई कमेंट्स में कहा गया कि लड़कियों को ऐसा महसूस कराया जा रहा है कि करियर ही सब कुछ है और परिवार बनाने के फैसले को टाला जा सकता है—जबकि जैविक वास्तविकता अलग होती है।

कई महिलाएं इस राय से असहमत थीं कि एग-फ्रीजिंग को 'जरूरी' बताना गलत है। उनका कहना था कि यह एक व्यक्तिगत पसंद होनी चाहिए, लेकिन इसे जनरलाइज़ करके 'सबसे बड़ा इंश्योरेंस' कहना ठीक नहीं है। कुछ ने कहा कि अगर कोई महिला करियर, शादी और परिवार को बैलेंस करना चाहती है तो इसके कई नैचुरल तरीके हैं।

वहीं दूसरी तरफ कई लोग उपासना का समर्थन करते हुए भी दिखाई दिए। उनके मुताबिक उपासना ने एक आधुनिक और प्रैक्टिकल विचार रखा है जिसमें महिलाओं को अपनी लाइफ के बड़े फैसले खुद लेने का अधिकार मिलता है। उनके अनुसार समाज को बदलते समय के साथ चलना चाहिए और महिलाओं को फाइनेंशियल और पर्सनल फ्रीडम देने के लिए नई तकनीक और मेडिकल विकल्पों को गलत नजर से नहीं देखना चाहिए।

लोगों के बीच इस बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिक टेक्नोलॉजी लोगों की निजी पसंद को बेहतर बनाती है या फिर रिश्तों और परिवार के प्राकृतिक ढांचे को बदल देती है। IVF और एग-फ्रीजिंग जैसी तकनीकों को लेकर भारत में जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन समाज अभी भी इस मामले में काफी बंटा हुआ है।

यहां यह भी समझना जरूरी है कि उपासना खुद अपोलो हॉस्पिटल ग्रुप के फाउंडर डॉ. सी. प्रताप रेड्डी की पोती हैं और अपोलो फाउंडेशन की वाइस चेयरपर्सन हैं। उनकी बैकग्राउंड हेल्थकेयर से जुड़ी होने के कारण कई लोग यह मान रहे हैं कि उनका बयान एक तरह का कॉर्पोरेट प्रमोशन भी हो सकता है। हालांकि उनके समर्थक इसे पूरी तरह एक पर्सनल ओपिनियन मान रहे हैं।

उपासना और राम चरण की फैमिली लाइफ भी उनके इस बयान के साथ काफी चर्चा में है। कपल की पहली बेटी क्लिन कारा 2023 में पैदा हुई थी और अब वे जुड़वां बच्चों के होने का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से कई लोग कह रहे हैं कि उपासना अपनी लाइफस्टाइल और फैसलों को जनरल लाइफ और मिडिल क्लास की लाइफस्टाइल के बराबर नहीं समझ सकतीं।

IVF और एग-फ्रीजिंग पर इस तरह की बहसें भारत में नई नहीं हैं। समाज में करियर, शादी, उम्र, प्लानिंग और बायोलॉजिकल क्लॉक को लेकर लगातार नई सोच उभर रही है, लेकिन अभी भी पारंपरिक विचारधाराएं मजबूत हैं। इसीलिए जब कोई पब्लिक फिगर इस तरह का बयान देता है, तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही तेज होती है।

नतीजे के तौर पर यह पूरा मामला सिर्फ एक सलाह का नहीं बल्कि बदलते भारत के माइंडसेट का संकेत देता है। यहां एक तरफ आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने का विचार है, तो वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक मूल्यों और वास्तविक मेडिकल चुनौतियों को ध्यान में रखने की चेतावनी भी है।

इस विवाद से यह साफ है कि IVF, एग-फ्रीजिंग और महिलाओं की लाइफ चॉइसेज जैसे विषय अभी भी भारत में एक संवेदनशील और गहन चर्चा का हिस्सा बने रहेंगे। उपासना का बयान चाहे सही हो या गलत, लेकिन इसने देश में एक जरूरी बातचीत को जरूर शुरू कर दिया है—कि आखिर आज की महिलाओं के लिए अपनी लाइफ प्लानिंग का सही तरीका क्या है?

“आधुनिक फैसले तभी सफल होते हैं, जब वे जानकारियों, जिम्मेदारियों और वास्तविकताओं के साथ बैलेंस होकर लिए जाएं।”
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