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Uttarkashi BSNL Network Update: Barsali Patti Mein Signal Ki Wapsi

JantaTimes Staff26 November 2025 at 12:03 pm
उत्तरकाशी की बरसाली पट्टी में महीनों से गायब मोबाइल नेटवर्क अब BSNL के नए टावर के साथ लौटने वाला है, जिससे हजारों लोगों की डिजिटल जिंदगी बदलने की उम्मीद है।
Uttarkashi BSNL Network Update: Barsali Patti Mein Signal Ki Wapsi

Uttarkashi BSNL Network को लेकर बरसाली पट्टी के ग्रामीणों ने लंबे समय बाद राहत की सांस ली है। पहाड़ों की इस शांत घाटी में जहां मोबाइल फोन महीनों से सिर्फ घड़ी और कैमरे का काम कर रहा था, अब BSNL का नया टावर उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर खड़ा है।

उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों में बसे सिंगोट, पाव, मंगली सेरा और कुंसी जैसे गांव पिछले कई हफ्तों से मोबाइल नेटवर्क के बिना जीवन काट रहे हैं। यहां लोग फोन करने या इंटरनेट चलाने के लिए 12 किलोमीटर दूर गंगोत्री हाईवे के नकुरी इलाके तक जाना पड़ता है। नेटवर्क की एक लकीर पकड़ने के लिए लोग कभी पैदल, तो कभी बाइक से इतनी कठिन दूरी तय करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नेटवर्क बंद होने के बाद सबसे ज्यादा असर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पर पड़ा है। बैंकिंग, सरकारी योजनाओं के ऑनलाइन फॉर्म और अस्पतालों से जुड़ी जरूरी जानकारी तक पहुंचने में भी बेहद परेशानी होती है। गांव वालों के मुताबिक, आपसी बातचीत भी केवल तब हो पाती है जब लोग घरों से निकलकर एक-दूसरे से मिलें।

पहले इस इलाके में एक निजी कंपनी का टावर था, लेकिन कंपनी की सेवा बंद होने के साथ ही पूरा क्षेत्र नेटवर्क से कट गया। इसके बाद BSNL ने सिंगोट गांव में नया मोबाइल टावर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर काम पूरा हो चुका है और अब सिर्फ सैटेलाइट लिंक जुड़ते ही टावर सक्रिय हो जाएगा। टावर चालू होते ही कई गांवों में वर्षों बाद एक साथ मोबाइल नेटवर्क की वापसी होगी।

BSNL के असिस्टेंट जनरल मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि सिर्फ एक टावर ही नहीं, बल्कि पाव गांव में एक और टावर लगाने का प्रस्ताव भी बढ़ा दिया गया है। यदि इसे मंज़ूरी मिलती है, तो पूरी बरसाली पट्टी में नेटवर्क स्थिर और मजबूत होगा। ग्रामीणों के अनुसार, यह सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि उनके रोजमर्रा के जीवन में ‘डिजिटल बहाली’ जैसा बदलाव होगा।

गांव के लोग बताते हैं कि जब भी वे BSNL के नए टावर के बारे में अपडेट सुनते हैं, पूरे क्षेत्र में एक अलग ही ऊर्जा फैल जाती है। कई ग्रामीण रोज शाम टावर के आसपास जाकर काम का जायज़ा लेते हैं। तकनीकी प्रक्रिया में जरा सी देरी भी उन्हें चिंतित कर देती है, लेकिन अगले दिन होने वाली किसी छोटी प्रगति से उनकी उम्मीदें फिर ताज़ा हो जाती हैं।

भारत के दुर्गम इलाकों में नेटवर्क पहुंचाने का यह प्रयास नया नहीं है। हाल ही में एयरटेल ने लद्दाख के मान और मेरक गांवों में भी नेटवर्क पहुंचाकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी, जो भारत-चीन सीमा के बेहद नजदीक स्थित हैं। यह सिद्ध करता है कि तकनीक और संकल्प मिलकर सबसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को भी पार कर सकते हैं।

बरसाली पट्टी के लोग अब बेसब्री से उस पल का इंतज़ार कर रहे हैं जब उनके मोबाइल में पहली बार फिर से सिग्नल की टोन गूंजेगी। वे चाहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू हो, ऑनलाइन सेवाएं आसान बनें और किसी आपात स्थिति में मिनटों में मदद हासिल हो सके। यह टावर उनके लिए सिर्फ संचार सुविधा नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र को डिजिटल भारत का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

“जब पहाड़ों में पहली बार मोबाइल की घंटी बजेगी, बरसाली पट्टी के लोगों के लिए वह सिर्फ सिग्नल नहीं, बल्कि जुड़ाव की नई शुरुआत होगी।”
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