झांसी: झाड़फूंक के नाम पर तांत्रिक ने 12 साल की बच्ची से की 'Sexual Harassment', परिवार में दहशत

Uttar Pradesh के Jhansi जिले से एक बेहद Shocking और Disturbing ख़बर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में डर और आक्रोश (Outrage) पैदा कर दिया है। बरुआसागर थाना क्षेत्र में एक तथाकथित (So-called) तांत्रिक ने झाड़फूंक और इलाज के नाम पर एक 12 साल की मासूम बच्ची के साथ बंद कमरे में Grave Misconduct किया। इस घटना ने एक बार फिर समाज में अंधविश्वास (Superstition) और धोखेबाज लोगों पर विश्वास करने के ख़तरों को उजागर किया है। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा (Social Security) पर एक गंभीर सवाल है।
पीड़ित परिवार की Heart-Wrenching Story के मुताबिक, बच्ची पिछले कुछ दिनों से गले में तेज दर्द और खाना न खा पाने की समस्या से जूझ रही थी। कई डॉक्टरी इलाज के बावजूद जब बच्ची को आराम नहीं मिला, तो कुछ लोगों ने इस बीमारी को 'ऊपरी चक्कर' या भूत-प्रेत का साया बताकर तांत्रिक की मदद लेने की सलाह दी। भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-Urban) इलाकों में आज भी ऐसी बीमारियों को लेकर मेडिकल साइंस के बजाय इन अवैज्ञानिक तरीकों पर भरोसा करना एक बड़ी Social Challenge है। इसी अंधविश्वास का शिकार यह मासूम परिवार भी हो गया।
तांत्रिक की तलाश में परिवार को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के निवाड़ी (Niwari) जिले के सिनौनिया गांव के हरभजन नाम के एक व्यक्ति का पता चला, जो खुद को Expert in Tantra-Kriya बताता था। 18 नवंबर को उस तांत्रिक को पीड़ित बच्ची के घर बुलाया गया। घर आते ही उस शातिर (Cunning) तांत्रिक ने बच्ची को देखते ही यह घोषणा कर दी कि उस पर 'भूत-प्रेत का साया' है और इसका इलाज 'तंत्र क्रिया' के माध्यम से **Isolation** में ही किया जा सकता है। यह अपराधियों की एक Common Tactic होती है, जिसके तहत वे Victim और Witnesses को अलग कर देते हैं।
उसने परिवार को सख्त हिदायत दी कि तंत्र-क्रिया के दौरान बच्ची चाहे कितना भी रोए या चिल्लाए, लेकिन No One Should Enter the Room। बच्ची के माता-पिता, जो अपनी बेटी की तकलीफ से पहले ही परेशान थे और अंधविश्वास के जाल में फँस चुके थे, उसकी इस बात के झांसे में आ गए। तांत्रिक बच्ची को एक कमरे में ले गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। यह उस **Heartless Crime** की शुरुआत थी, जिसके बारे में परिवार ने कभी सोचा भी नहीं था।
कुछ देर बाद, कमरे के अंदर से बच्ची के रोने की आवाजें आने लगीं। माता-पिता का दिल दहल गया, लेकिन तांत्रिक की बात पर विश्वास करके उन्होंने Interfere नहीं किया। यह उनके लिए एक अत्यंत Painful Moment रहा होगा, जब वे अपनी बेटी को बचाने के लिए बाहर खड़े रहे और अंदर नहीं जा सके। करीब आधा घंटा बीतने के बाद तांत्रिक हरभजन बाहर निकला। उसने एक Pretended Calmness के साथ कहा कि पूजा पूरी हो गई है और अब बच्ची को आराम मिलेगा। यह कहकर वह जल्दबाजी में वहाँ से **Escaped** हो गया।
तांत्रिक के जाते ही माँ दौड़कर कमरे में गई। बच्ची अपनी माँ से लिपटकर Inconsolable Tears के साथ रोने लगी और फिर उसने अपनी आपबीती सुनाई। बच्ची ने बताया कि उस दरिंदे (Monster) ने इलाज के नाम पर उसके **Clothes Removed** करवा दिए, उसके शरीर पर नींबू रगड़ा, और फिर उसके साथ कई Sexually Offensive Acts किए। यह सुनकर माँ-बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके विश्वास का यह **Cruel Betrayal** था। जिस व्यक्ति को उन्होंने अपनी बेटी के इलाज के लिए बुलाया था, उसी ने उनकी बेटी के साथ इतना घिनौना काम किया।
इस दर्दनाक घटना के बाद, पीड़ित बच्ची के पिता ने **Immediate Action** लिया और बरुआसागर थाने पहुँचे। उन्होंने आरोपी तांत्रिक हरभजन के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। बरुआसागर थाना प्रभारी (SHO) राहुल राठौर ने मीडिया को बताया कि बच्ची की माँ की शिकायत के आधार पर आरोपी हरभजन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act) की संबंधित धाराओं – 75(2), 7 और 8 के तहत FIR Registered कर ली गई है।
पुलिस टीम अब आरोपी तांत्रिक हरभजन की तलाश में जुटी है। चूँकि आरोपी मध्य प्रदेश के निवाड़ी का रहने वाला है, इसलिए **Inter-State Police Coordination** की भी आवश्यकता पड़ सकती है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि आरोपी को जल्द से जल्द Arrested किया जाएगा और उसे कानून के तहत सख्त से सख्त सजा (Harshest Punishment) दिलाई जाएगी। इस बीच, बच्ची की Counselling and Medical Examination भी प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है, ताकि वह इस सदमे (Trauma) से उबर सके।
Social Context and Conclusion: यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास की जड़ों को दिखाती है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी Vulnerable People को निशाना बनाते हैं। Superstition के नाम पर होने वाले ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में **Awareness Campaigns** चलाने की सख्त ज़रूरत है। लोगों को यह समझना होगा कि बीमारियाँ सिर्फ मेडिकल साइंस से ही ठीक होती हैं, न कि झाड़फूंक या तंत्र-मंत्र से। Child Safety और Parental Awareness आज समय की सबसे बड़ी मांग है। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई (Prompt Action) सराहनीय है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी और उसे सजा मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। समाज को मिलकर ऐसे Fake Tantriks और अपराधियों का बहिष्कार (Boycott) करना होगा जो आस्था का दुरुपयोग करते हैं।
इस घटना ने झांसी और आस-पास के क्षेत्रों के माता-पिता को **Highly Alert** कर दिया है। यह केस सभी पेरेंट्स के लिए एक Wake-up Call है कि वे अपने बच्चों को हमेशा सुरक्षित रखें और किसी भी अपरिचित व्यक्ति (Stranger) को उनके साथ अकेले में न छोड़ें, खासकर जब बात किसी 'अंधविश्वास आधारित' इलाज की हो। पुलिस को ऐसे मामलों में Zero Tolerance Policy अपनानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति आस्था के नाम पर बच्चों की सुरक्षा और Innocence के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। हम आशा करते हैं कि बच्ची को न्याय मिलेगा और आरोपी तांत्रिक को उसके जघन्य अपराध के लिए Due Punishment दी जाएगी।
“अंधविश्वास सिर्फ एक भ्रम नहीं है, यह एक सामाजिक बीमारी है जिसका फायदा उठाकर अपराधी मासूमों की ज़िंदगी तबाह करते हैं।”