95 हारों का सिलसिला जारी: बिहार चुनाव में BJP की जबरदस्त जीत पर Rahul Gandhi पर तंज

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने देश की राजनीति में एक बार फिर तहलका मचा दिया है। जहां BJP ने लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ धमाकेदार जीत दर्ज की है, वहीं राहुल गांधी इस बार भी अपने राजनीतिक करियर में लगातार हार का निशाना बने दिख रहे हैं।
चुनाव से पहले राहुल गांधी ने 16 दिनों तक बिहार के 20 जिलों में जाकर ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली। उन्होंने वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, लेकिन नतीजे उनकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहे। भाजपा की ओर से मिली यह जीत विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है।
भाजपा ने कुल मिलाकर लगभग 199 सीटें हासिल की हैं, जबकि राजद महागठबंधन महज 38 सीटों पर आगे है और कांग्रेस केवल 4 सीटों तक सीमित रह गई है। इस चुनाव में जदयू को 81 सीटें मिली हैं और एलजेपी को 21। इस परिणाम के बाद भाजपा के नेताओं ने राहुल गांधी को लेकर तीखे कटाक्ष किए हैं।
BJP के प्रवक्ता अमित मलवीय ने कहा, "अगर लगातार चुनाव हारने का कोई पुरस्कार होता, तो वह राहुल गांधी को जाता।" वहीं, सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कबीरदास की दोहा याद दिलाते हुए कहा कि पहले खुद की गलतियों को समझो, फिर दूसरों को दोष दो। भाजपा के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बिहार की जनता ने अब जंगलराज, भ्रष्टाचार और परिवारवाद को पूरी तरह से नकार दिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, "राहुल गांधी नंबर 1 हैं - हारने में अचूक।" उन्होंने मज़ाकिया अंदाज में कहा कि 95 चुनाव हारना कोई मामूली बात नहीं, यह तो एक रिकॉर्ड है।
वहीं, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग के चीफ चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जनता की इच्छा के खिलाफ काम कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि करोड़ों वोटरों को सूची से हटाया गया है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस चुनाव को ‘चुनावी साजिश’ बताया और कहा कि भाजपा की ये चालें अब देश के अन्य राज्यों में काम नहीं आएंगी। विपक्ष का कहना है कि वोटर सूचियों की समीक्षा का उपयोग महागठबंधन समर्थकों को रोकने के लिए किया गया, जो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
भाजपा की जीत के साथ ही बिहार में राजनीतिक परिदृश्य साफ हो गया है कि जनता ने विकास और अच्छे शासन को चुना है। लेकिन चुनाव के बाद उठे विवाद और आरोप इस चुनाव को सिर्फ एक चुनाव से कहीं ज्यादा बना देते हैं। यह एक ऐसे दौर की शुरुआत भी हो सकती है, जहां लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहन चर्चा होगी।
“राजनीति में हार और जीत तो चलती रहती है, लेकिन सच्चाई और लोकतंत्र की रक्षा हमेशा सर्वोपरि होनी चाहिए।”