दुमका में स्थापना दिवस पर सियासी शक्ति का प्रदर्शन, विकास और पहचान को लेकर सरकार का बड़ा संदेश | Dumka's foundation day showcases political power

दुमका में स्थापना दिवस पर सियासी शक्ति का प्रदर्शन, विकास और पहचान को लेकर सरकार का बड़ा संदेश
झारखंड के स्थापना दिवस पर दुमका ने एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने का अवसर देखा। उपराजधानी होने के नाते इस शहर का महत्व पहले से ही खास है, और सोमवार को आयोजित विशाल समारोह में इस पहचान को और अधिक प्रबल रूप से सामने रखा गया। बड़े पंडाल में उमड़ी भीड़, स्थानीय संस्कृति की झलक और नेताओं के भावनात्मक संबोधन ने इस कार्यक्रम को एक व्यापक राजनीतिक संदेश में बदल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत एक दिवंगत आदिवासी नेता को श्रद्धांजलि देकर हुई। उन्हें झारखंड आंदोलन के मजबूत स्तंभ के रूप में याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी संघर्षशील सोच आज भी राज्य की दिशा तय करती है और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है। 'जल, जंगल, जमीन' की रक्षा के लिए युवाओं को आगे आने की अपील पूरे समारोह का भावनात्मक केंद्र रही।
राजनीतिक माहौल भी कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। नेताओं ने बिना नाम लिए विपक्ष पर आरोप लगाए कि उन्होंने आदिवासी और मूल निवासी समुदायों को प्रभावित करने वाली कई योजनाओं को रोकने का कार्य किया। विशेष रूप से शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं को बंद किए जाने की बात कही गई, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ा।
इस दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई। वर्षों पहले जिस फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की नींव रखी गई थी और बाद में राजनीतिक कारणों से रोक दिया गया था, उसे दोबारा शुरू कर दिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि यह संस्थान न केवल दुमका बल्कि पूरे झारखंड के लिए नई पहचान बनने की क्षमता रखता है। रोजगार, प्रशिक्षण और नए अवसरों के रूप में इसे क्षेत्र के लिए बड़ा कदम बताया गया।
नेताओं ने स्वीकार किया कि 25 वर्षों की राजनीति आसान नहीं रही। कई राजनीतिक चुनौतियों और आरोपों के बीच उन्हें जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा। लेकिन अब वर्तमान सरकार के नेतृत्व में विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है और आने वाले समय में इसके और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
समारोह में दुमका की उपराजधानी के रूप में स्थिति पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस क्षेत्र को प्राथमिकता देकर पूरे राज्य के विकास मॉडल को मजबूत किया जा सकता है। सरकार का संदेश स्पष्ट था—यदि जनता एक कदम बढ़ाएगी तो सरकार दो कदम आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
स्थानीय विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य आदिवासी-मूलवासी समुदायों की आकांक्षाओं को पूरा करना है। सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए विकास गति देने का भरोसा दिलाया गया। उनका कहना था कि संताल परगना को विकास की नई मिसाल बनाया जाएगा।