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Rajasthan Bus Body Crisis: Jaisalmer Accident के बाद 200 Units सीज

JantaTimes Staff21 November 2025 at 12:17 pm
जैसलमेर बस हादसे के बाद राजस्थान में करीब 200 बस बॉडी बिल्डर्स के कारखाने सीज होने से उद्योग गहरे संकट में है। इससे सैकड़ों मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ा है और तैयार बसें भी फंस गई हैं।
Rajasthan Bus Body Crisis: Jaisalmer Accident के बाद 200 Units सीज

Rajasthan Bus Body Builders Crisis पिछले कुछ समय में राज्य का सबसे साइलेंट लेकिन गहराई तक असर डालने वाला मुद्दा बन गया है। जैसलमेर बस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने जिस तरह बड़ी कार्रवाई की, उसने पूरे उद्योग को हिलाकर रख दिया है। Hindi-English mix में यह मामला अब चर्चा का मुख्य विषय बन चुका है क्योंकि करीब 200 कारखानों के सीज होने से हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी खतरे में आ गई है।

यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई का परिणाम नहीं है, बल्कि पूरे बस बॉडी बिल्डिंग सेक्टर की नींव हिलाने वाला फैसला साबित हो रहा है। राजस्थान में छोटी-बड़ी सैकड़ों यूनिट्स सालों से बस बॉडी निर्माण का काम कर रही हैं, जिन पर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, टूरिज़्म बिज़नेस और लोकल ट्रैवल कंपनियां निर्भर रहती हैं। लेकिन जैसलमेर हादसे के बाद परिवहन विभाग ने सुरक्षा नियमों को आधार बनाकर सभी यूनिट्स पर एक साथ ताले जड़ दिए।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि तैयार खड़ी बसें, अधूरी निर्माणाधीन बसें और ग्राहकों के आदेश पर बनी बॉडी सभी एक ही जगह फंस गईं। इससे बिज़नेस का कैश फ्लो रुक गया, मालिकों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया और मजदूरों की आय पूरी तरह बंद हो चुकी है।

इस पूरे मामले में All Rajasthan Bus-Truck Body Builders Association ने सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंता और असंतोष जाहिर किया है। एसोसिएशन का कहना है कि 16 अक्टूबर को एक साथ सभी यूनिट्स को सील कर दिया गया, जबकि यही वही जगहें हैं जहां पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से बसें बनती रही हैं और RTO पासिंग के बाद ही ग्राहकों को डिलीवर होती हैं। उनके अनुसार यदि किसी बस में कमी होती है तो RTO पासिंग न देकर उसे रोक सकता है, लेकिन फैक्ट्रियों को पूरी तरह बंद कर देना अत्यधिक कठोर कदम है।

कई बॉडी बिल्डर्स ने बताया कि उनके पास पहले से तैयार खड़ी बसें हैं जिन्हें ग्राहकों को सौंपा जाना था, लेकिन अचानक कार्रवाई होने से न सिर्फ डिलीवरी रुक गई, बल्कि ट्रांसपोर्ट कंपनियों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

राजस्थली ट्रैवल्स के मालिक मुकेश कुमार ने बताया कि उनकी दो बसें भी इसी कार्रवाई की भेंट चढ़ गई हैं। वह कहते हैं कि बस लगभग तैयार थीं, लेकिन अब कारखाने में बंद पड़ी हैं और हम उन्हें उपयोग में नहीं ले पा रहे। इससे पर्यटन सीजन में भारी नुकसान हो रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब बसें नियमों के अनुसार बन रही हैं और सभी दस्तावेज मौजूद हैं, तो फिर उन्हें क्यों रोका जा रहा है? यदि कोई बन रही बस मानकों पर खरा नहीं उतरती तो उस विशेष वाहन को पास न करें, लेकिन पूरे उद्योग को बंद कर देना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।

कई बॉडी बिल्डर्स ने यह भी कहा कि अचानक सीलिंग से मजदूरों की रोज़ी छिन गई है। फिटर, वेल्डर, पेंटर, हार्डवेयर इंस्टॉलर जैसे कर्मचारी प्रतिदिन के वेतन पर काम करते हैं और अब बेरोजगार हो गए हैं।

पूरे राज्य में अब यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार इस उद्योग को दोबारा चालू करने के लिए कोई स्पष्ट नीति लेकर आएगी। कई ट्रांसपोर्टर इस बात पर भी चिंता जता रहे हैं कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो टूरिस्ट सीजन में बसों की कमी हो सकती है, जिससे राजस्थान के पर्यटन कारोबार पर भी असर पड़ेगा।

Industry Experts का कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन अचानक की गई कठोर कार्रवाई से उद्योग को अपूरणीय क्षति हो सकती है। उनका सुझाव है कि सरकार को एक ‘Revised Compliance Model’ बनाना चाहिए, जिसमें उद्योग को समय दिया जाए और सुधारों की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू हो।

एसोसिएशन ने मांग की है कि सभी सीज किए गए कारखानों को तुरंत खोलने की अनुमति दी जाए और पहले से जमा कराए गए दस्तावेज जांच के बाद वापस किए जाएं। साथ ही सरकार ऐसी नीति बनाए जिसमें सुरक्षित बस निर्माण हो सके, लेकिन उद्योग भी चलता रहे।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि परिवहन विभाग आगे क्या निर्णय लेता है। यदि उद्योग लंबे समय तक बंद रहा, तो हजारों परिवारों की आजीविका पर बड़ा संकट मंडरा सकता है। यह मामला अब सिर्फ एक हादसे पर एक्शन नहीं, बल्कि राजस्थान के पूरे ट्रांसपोर्ट और बॉडी बिल्डिंग सेक्टर की भविष्य दिशा तय करने वाला मुद्दा बन चुका है।

“उद्योग पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें सुरक्षा भी बनी रहे और लोगों की रोज़ी-रोटी भी न छिने।”
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