Rohtak Monthly Case: SIT ने गनर सुशील पर चार्जशीट फाइल की

Rohtak Monthly Case हरियाणा पुलिस व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करने वाला मामला बन गया है। एडीजीपी वाई पूरण कुमार के गनर रहे सुशील कुमार पर ठेकेदारों से मंथली वसूलने, धमकाने और अपने पद का गलत फायदा उठाने के आरोप लगे हैं। अब विशेष जांच टीम यानी SIT ने उसके खिलाफ विस्तृत चार्जशीट तैयार कर ली है, जिसे जल्द अदालत में दाखिल किया जाना है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब शराब ठेकेदार प्रवीण बंसल ने छह अक्टूबर को अर्बन एस्टेट थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि वह रोहतक में शराब ठेकों का काम करते हैं। लंबे समय से बड़े-बड़े गैंगों द्वारा उनसे जबरन वसूली की कोशिश की जा रही थी, जिसके चलते उन्हें पुलिस सुरक्षा भी मिली हुई थी।
इसी दौरान एक व्यक्ति, जिसने खुद को ‘सुशील’ नाम से परिचित कराया, उनसे मिलने आया और बोला कि उसे IG ऑफिस में बुलाया गया है। उसने खुद को एडीजीपी के बेहद करीब और उनके विश्वासपात्र व्यक्ति के रूप में पेश किया। ठेकेदार के मुताबिक, उसकी बातों में अधिकार का दंभ साफ झलक रहा था।
प्रवीण बंसल ने बताया कि जब वह जून माह में IG ऑफिस पहुंचे, तो वहां सुशील कुमार ने उनसे बेहद धमकी भरे लहजे में बात की। सुशील ने कहा कि यदि रोहतक में शराब ठेका चलाना है, तो ‘मंथली’ देनी पड़ेगी। अन्यथा उन पर शराब तस्करी और कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज करवा दिया जाएगा।
इसके बाद एक दिन सुशील कुमार ने फोन करके अपने सेक्टर-1 स्थित दफ्तर में मिलने को कहा। उसने अपने साथी जयभगवान को भी वहां बुला लिया। मुलाकात के दौरान सुशील ने ठेकेदार से ढाई लाख रुपये की मंथली की मांग की और दावा किया कि ‘आईजी साहब पूरी सपोर्ट करेंगे’। यह सुनकर ठेकेदार हैरान रह गया, क्योंकि यह सीधा पुलिस तंत्र का दुरुपयोग था।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और सात सितंबर को आरोपी सुशील कुमार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पहले वह रोहतक जेल में रखा गया और बाद में सुरक्षा कारणों से अंबाला जेल शिफ्ट कर दिया गया।
इस प्रकरण की जांच SIT को सौंप दी गई। अब पुलिस सूत्रों के मुताबिक, SIT ने आरोपी सुशील कुमार के खिलाफ चार्जशीट लगभग पूरी कर ली है। चार्जशीट अदालत में दाखिल करने से पहले कानून विशेषज्ञों से इसकी जांच करवाई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी कमी न रह जाए। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अदालत में पेश की जाने वाली चार्जशीट मजबूत हो और गवाही तथा सबूतों के आधार पर मामले में ठोस कार्रवाई हो सके।
सूत्र बताते हैं कि चार्जशीट में अभी केवल सुशील कुमार को ही आरोपी बनाया गया है। जांच में फिलहाल किसी अन्य पुलिस अधिकारी या व्यक्ति के शामिल होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि SIT ने जांच के दौरान कई पुलिसकर्मियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की है।
अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार शाम तक चार्जशीट अदालत में दाखिल की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। एक अधिकारी ने बताया कि 'चार्जशीट तैयार है, दस्तावेज पूरे किए जा रहे हैं, जल्द ही अदालत में दाखिल कर दी जाएगी।'
यह मामला रोहतक सहित पूरे हरियाणा में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस विभाग में ऐसी घटनाएं आम जनता के भरोसे पर गम्भीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। जब किसी एडीजीपी के गनर पर ही जबरन वसूली, धमकी देने और गैंगों से मिलीभगत का आरोप लगता है, तो यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है।
स्थानीय व्यापारियों में भी इस घटना के बाद डर और गुस्से का माहौल है। कई लोग खुले तौर पर बोल तो नहीं रहे, परंतु उनका मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल न कर सके। चौकाने वाली बात यह रही कि आरोपी सुशील ने खुद को IG का खास आदमी बताकर ठेकेदारों में डर पैदा किया और इसका फायदा उठाने की कोशिश की।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले में कई अहम बिंदुओं पर गहनता से जांच की गई है। मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, शिकायतकर्ता के बयान और मौके पर मिले साक्ष्यों को एक-एक करके जांचा गया है। SIT की कोशिश है कि आरोप पत्र में सारे सबूत इतने मजबूत हों कि अदालत में उसकी स्थिति कमजोर न पड़े।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आरोपी ने वास्तव में किसी बड़े अधिकारी का नाम लेकर फायदा उठाने की कोशिश की, या फिर यह उसकी खुद की मनगढ़ंत कहानी थी। इस एंगल पर भी SIT ने विस्तार से जांच की है। फिलहाल किसी वरिष्ठ अधिकारी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है।
जैसे ही चार्जशीट अदालत में दाखिल होगी, सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी। संभव है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे सामने आएं। इस मामले को लेकर आम जनता, व्यापारी संगठन और राजनीतिक हलकों में भी हलचल बनी हुई है।
यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था को चुनौती देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भ्रष्टाचार किस स्तर तक पहुंच चुका है। जनता उम्मीद कर रही है कि इस बार मामले को न दबाया जाएगा और न ही किसी तरह का राजनीतिक दबाव आएगा। सारे लोगों की नजरें अब अदालत और SIT की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
मंथली प्रकरण सिर्फ एक केस नहीं बल्कि पुलिस तंत्र में मौजूद कमजोरियों का आईना है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई न की जाए, तो अपराधी तंत्र और मजबूत होता जाता है। उम्मीद है कि कड़ी जांच और ठोस आरोप पत्र के आधार पर यह मामला निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगा।
“जब सत्ता या पद के बल पर डर पैदा किया जाए, तो कानून का डर खत्म होने लगता है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई ही न्याय का रास्ता बनाती है।”