FPIs की बिकवाली जारी, पर DIIs का Record Buying Market को दे रहा है मज़बूत सहारा!

Indian Stock Market में इस वक्त की सबसे बड़ी ख़बर FPIs (Foreign Portfolio Investors) और DIIs (Domestic Institutional Investors) के बीच चल रही ज़बरदस्त खींचतान है। नवंबर 2025 में FPIs ने एक बार फिर से बिकवाली (Net Selling) शुरू कर दी है, जिसकी वजह से भारतीय बाज़ार में ऊपरी स्तरों पर थोड़ा Pressure बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में FPIs ने ₹1,750 करोड़ से ज़्यादा की नेट बिकवाली की है, जो ग्लोबल सेंटीमेंट में हो रहे Shifts को दर्शाती है।
लेकिन इस बिकवाली का Market पर कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा, और इसका सारा Credit जाता है हमारे Domestic Investors को। DIIs, जिसमें Mutual Funds, Insurance Companies और Pension Funds शामिल हैं, ने FPIs की Selling को न केवल Absorbed किया है, बल्कि अपनी Net Buying को भी रिकॉर्ड स्तर पर बनाए रखा है। पिछले कुछ दिनों में DIIs ने ₹5,100 करोड़ से ज़्यादा की Buying की है, जो Market को Stability दे रही है।
सितंबर 2025 तक के डेटा से पता चलता है कि FPIs की Holding NSE-Listed Companies में गिरकर 15-Year Low यानी सिर्फ 16.9% रह गई है। इसके उलट, DIIs की होल्डिंग ने लगातार 9वीं तिमाही में रिकॉर्ड बनाया है। यह एक बड़ा Structural Change है, जो दिखाता है कि भारतीय बाज़ार की दिशा अब Local Money Flow से तय हो रही है, न कि सिर्फ Global Cues से।
Experts का मानना है कि FPIs की Selling के पीछे सबसे बड़ा कारण US Market में Artificial Intelligence (AI) से जुड़ी Mega-Cap Companies का Unprecedented Boom है। Global Funds अपने पैसे को उन मार्केट्स में लगा रहे हैं जहां उन्हें ज़्यादा तेज़ रिटर्न (Higher and Quicker Returns) की उम्मीद है। FPIs India को फिलहाल एक AI Underperformer मान रहे हैं, जिसकी वजह से वे यहां से पैसा निकालकर US, South Korea और Taiwan जैसे Tech-Driven Markets में लगा रहे हैं।
एक और दिलचस्प बात यह है कि Indian Stocks की Valuation इस वक्त US Stocks के मुकाबले लगभग 20% Discount पर ट्रेड कर रही है, जो पिछले 17 सालों में सबसे ज़्यादा है। Historical Trends देखें तो भारतीय बाज़ार अक्सर US मार्केट से Premium पर ट्रेड करते थे। Analysts इसे Long-Term Investors के लिए एक Rare Bargain Opportunity मान रहे हैं, खासकर तब जब India की Corporate Earnings Cycle अब Positive Turn ले रही है।
बाज़ार में इस वक्त Corporate Earnings पर भी नज़र बनी हुई है। Tata Steel ने Q2 में अपने Consolidated Net Profit में 272% की शानदार बढ़त दर्ज की है, जो Sector में मज़बूती को दिखाता है। दूसरी ओर, Budget Carrier SpiceJet को Q2 में ₹621 करोड़ का Net Loss हुआ है, जो Aviation Sector की Challenges को उजागर करता है। Mixed Earnings के बावजूद, Mid-cap और Small-cap कंपनियों के नतीजे Expectations से थोड़े बेहतर रहे हैं।
आईटी सेक्टर में भी Action है। TCS (Tata Consultancy Services) ने 14 साल बाद Infosys और HCLTech के मुकाबले अपनी Valuation Premium खो दी है, जो IT Sector में बढ़ती Competition और Changing Dynamics को दर्शाता है। Honasa Consumer (Mamaearth की Parent Company) अब Oral Beauty सेगमेंट को India के लिए अगला $700 Million का Premium Frontier मान रही है, जो Fast-Evolving Consumer Preferences को दिखाता है।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि Retail Investor Participation रिकॉर्ड ऊँचाई पर है। Individual Investors की NSE-listed Companies में Market-Cap Share 22-Year High यानी 18.75% पर पहुँच गया है। SIPs के ज़रिए हर महीने ₹28,000 करोड़ से ज़्यादा का Flow आ रहा है, जो Market को Systematic Support दे रहा है। यह मज़बूती India की Long-Term Economic Story पर आम निवेशकों के अटूट Trust को साबित करती है।
इसके अलावा, भारत-US के बीच Trade Deal को लेकर बनी उम्मीदों से भी बाज़ार में Positive Sentiment है, जिससे IT, Auto, और Pharma Sectors में Uptrend देखा गया है। वहीं, अक्टूबर में Inflation का 10-Year Low पर आना दिसंबर में RBI Rate Cut की उम्मीदों को ज़िंदा रखता है, जिससे Business और Consumer Spending को Future Boost मिल सकता है। Overall Market Outlook Consolidation का है, लेकिन Underlying Domestic Strength बहुत मज़बूत है।
“Indian Market अब Global Money के Mood Swing पर नहीं, बल्कि Domestic Investor के मज़बूत इरादों पर चलता है – यही है New India की Financial Power।”