Stock Market Update: FPIs की 15-Year Low Holding, पर DIIs का भरोसा Top पर!

Indian Stock Market में इस वक्त एक दिलचस्प टसल देखने को मिल रही है। एक तरफ हमारे Foreign Portfolio Investors (FPIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर Domestic Institutional Investors (DIIs) और रिटेल इन्वेस्टर्स रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी करके market को एक मज़बूत सहारा दे रहे हैं। ये ट्रेंड बता रहा है कि इंडिया की इकॉनमी पर अब लोकल इन्वेस्टर्स का भरोसा कितना बढ़ गया है।
NSE के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, FPIs ने अपनी इंडियन इक्विटी होल्डिंग्स को 15-year low पर ला दिया है। 2025 में अब तक उनकी बिकवाली लगभग ₹2 लाख करोड़ के आस-पास रही है। यह गिरावट खासकर सितंबर तिमाही में और ज़्यादा तेज़ हुई, जहां Nifty 50 और Nifty 500 कंपनियों में FPIs की हिस्सेदारी कई सालों के निचले स्तर पर आ गई। इस selling का असर बड़े-बड़े लार्ज-कैप स्टॉक्स पर देखने को मिला है।
Experts का मानना है कि इस बिकवाली के पीछे दो-तीन बड़े कारण हैं। पहला, US मार्केट में AI-driven कंपनियों (जैसे 'Magnificent Seven') का ज़बरदस्त उछाल। इससे Global Investors को लग रहा है कि US मार्केट से ज़्यादा तेज़ी से रिटर्न मिल रहा है, इसलिए वे Indian Market से अपना पैसा निकालकर US में लगा रहे हैं। दूसरा कारण है Higher Interest Rate की आशंकाएं, जो इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा बाहर खींचती हैं।
लेकिन इस बिकवाली का एक positive side भी है। FPIs के जाने से पैदा हुए गैप को हमारे Domestic Mutual Funds और Retail Investors ने बहुत ही effectively fill किया है। Domestic Mutual Funds ने लगातार 9वीं तिमाही में अपनी ownership को नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाया है। हर महीने SIPs (Systematic Investment Plans) के ज़रिए आ रहे ₹28,000 करोड़ से ज़्यादा के inflows ने Domestic Flow को इतना strong बना दिया है कि वो FPIs की सेलिंग को absorb कर रहा है।
एक और मज़ेदार बात यह है कि Individual Investor Ownership भी steady बना हुआ है, खासकर Mid-cap और Small-cap सेगमेंट में उनका interest बढ़ा है। इससे साफ़ पता चलता है कि इंडियन इन्वेस्टर्स सिर्फ लार्ज-कैप तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ब्रॉडर मार्केट (broader market) में अच्छे रिटर्न की तलाश कर रहे हैं। DIIs की Total Ownership अब FPI Ownership को लगातार 4 तिमाहियों से पीछे छोड़ रही है, जो एक बड़ा structural shift है।
यह ट्रेंड Indian Stock Market की Resilience दिखाता है। कुछ साल पहले तक, FPIs की बिकवाली से मार्केट बुरी तरह क्रैश हो जाता था, लेकिन अब DIIs और retail money का flow इतना मज़बूत है कि market एक Stable Foundation पर खड़ा है। यानी अब भारतीय बाज़ार की दिशा तय करने में लोकल प्लेयर्स की भूमिका ज़्यादा अहम हो गई है, जो हमारी इकॉनमी के लिए एक Maturity Signal है।
इसके अलावा, कॉर्पोरेट वर्ल्ड में भी काफी एक्शन है। ReNew Energy Global जैसी बड़ी कंपनियों ने Green Energy Projects में ₹60,000 करोड़ के और निवेश की घोषणा की है, जो Renewable Energy Sector के लिए बड़ा बूस्ट है। वहीं, Muthoot Finance जैसी कंपनियों ने Q2 में शानदार 87% का प्रॉफ़िट ग्रोथ दिखाया है, जिससे फाइनेंशियल सेक्टर में भी ग्रोथ की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
हाल ही में IPOs की दुनिया में भी धूम रही। Groww जैसे वेल्थटेक प्लेटफॉर्म ने शानदार लिस्टिंग की, जिससे Startup Ecosystem और Fintech Industry में एक positive sentiment आया है। यह दर्शाता है कि इंडियन कंज्यूमर बिहेवियर में Digital Financial Services को लेकर कितना बड़ा shift आया है, और प्रॉफिटेबल स्टार्टअप्स को मार्केट में अच्छा वैल्यूएशन मिल रहा है।
Government ने Critical Minerals पर Royalty Rates को rationalize करने का भी फैसला लिया है, ताकि Domestic Production को बढ़ावा मिले। Graphite, Caesium, Rubidium जैसे मिनरल्स advanced tech और Energy Transition के लिए ज़रूरी हैं। यह कदम भारत को global supply chains में मज़बूत करने की दिशा में एक सोचा-समझा प्रयास है।
कुल मिलाकर, इंडियन बिज़नेस और शेयर मार्केट इस वक्त एक Transformative Phase से गुज़र रहा है। भले ही FPIs दूर जा रहे हों, लेकिन DIIs और retail power के दम पर मार्केट मज़बूती से खड़ा है। यह Atmanirbhar Investor की कहानी है, जो इंडियन ग्रोथ स्टोरी पर अपना भरोसा दिखा रहा है। मार्केट की चाल अब ग्लोबल संकेतों से ज़्यादा, डोमेस्टिक फंडामेंटल्स पर निर्भर कर रही है।
“FPIs का जाना शायद Global Jitters है, पर DIIs और Retail Investors का टिके रहना Indian Economy की Real Strength है।”